छत्तीसगढ़ प्राचीन इतिहास के अध्ययन के पूर्व प्रमुख तथ्यों का अवलोकन करते है जो ,कि cgpsc परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
★महत्वपूर्ण तथ्य★
* छत्तीसगढ़ को लोचन प्रसाद पाण्डे जी ने मानव सभ्यता का जन्मस्थली कहा है।
*चुम्बरढाल पहाड़ियों के शैलाश्रयों में रेलवे इंजीनियर अमरनाथ दत्त ने सन 1910 में अनेक गुफाओं की खोज की थी।
*छत्तीसगढ़ की सबसे प्राचीन गुफा सिंघनपुर गुफा(रायगढ़) की खोज सन 1910 में एंडरसन ने की थी।
*इंडिया पेंटिंग्स सन 1918 में तथा इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटेनिका के 13 वें अंक में रायगढ़ के सिंघनपुर के शैल चित्रों का प्रकाशन हुआ था!
*सिंघनपुर गुफा को चट्टानी आश्रम कहना अधिक उपयुक्त होगा क्योंकि इस गुफा में विश्व विख्यात शैलचित्र है।
* सबसे लंबी गुफा बोतल्दा (रायगढ़)
*प्रागैतिहासिक काल में सर्वाधिक शैलचित्र रायगढ़ जिले से प्राप्त हुए है।
*सिंघनपुर गुफा चित्र गहरे लाल रंग के है।*सिंघनपुर शैलचित्र 30000 वर्ष पुराने है। इन मूर्तियों की तुलना मैक्सिकन एवं स्पैनिश शैली से की जाती है।
इतिहास को मुुख्यतः तीन कालखंंडोंं मेें विभक्त किया गया —
1-प्रागैतिहासिक काल2.आद्य ऐतिहासिक काल3.ऐतिहासिक काल
उपरोक्त तीनों कालों को चरणबद्ध रूप से विस्तृत अध्ययन करेंगे ।
1.प्रागैतिहासिक काल(500000 ई.पू.से 2500 ई. पू.तक)—
वह काल जिसकी जानकारी पुरातात्विक स्रोतों से प्राप्त होती है।इस समय का कोई लिखित प्रमाण प्राप्त न हुआ है । इस काल को “प्रस्तर युग” भी कहा जाता है।प्रागैतिहासिक काल का शाब्दिक अर्थ होता है –“इतिहास के पूर्व का युग”
प्रागैतिहासिक काल को पुनः 3 काल खण्डों में विभाजित किया गया है –1.पूरा पाषाण काल–a)निम्न पुरापाषाण काल (b)मध्य पुरापाषाण काल (c)उच्च पुरापाषाण काल
2.मध्य पाषाण काल
3.नवपाषाण काल
छत्तीसगढ़ में प्रागैतिहासिक काल के प्रमाण 1.पुरापाषाण काल—-सिंघनपुर की गुफा (रायगढ़) हस्तचालित कुदाल ,गुफा चित्र ,शैलचित्र
2.मध्य पाषाण काल—कबरा पहाड़(रायगढ़) यहां की चित्रकारी में लाल रंग की छिपकली, घड़ियाल ,कुल्हाड़ी ,साम्भर आदि के चित्र बने है ।इस काल के लंबे फलक वाले औजार ,अर्धचन्द्राकार लघु पाषाण औजार के साख्य प्राप्त हुए है।
3.उत्तर पाषाण काल—- इस काल के प्रमाण मुख्यतः धनपुर ,महानदी घाटी(रायगढ़)सिंघनपुर से प्राप्त हुए है।यहाँ के पहाड़ों एवं गुफा में मानव आकृतियों का चित्रण तथा औजारों की आकृतियां खुदी हुई प्राप्त हुई है।
4.नवपाषाण काल— इस काल के प्रमाण छत्तीसगढ़ में मुख्यतः अर्जुनी (दुर्ग) ,चितवाडोंगरी(राजनांदगांव), टेरम(रायगढ़)बोनटीला(राजनांदगांव) से प्राप्त हुए है।
5.पाषाण घेरे —इसका तात्पर्य है पाषाण काल मे मनुष्य की मृत्यु होने पर शव को दफना कर उसके चारों ओर बड़े बड़े पत्थरो को गाड़ दिया जाता था ताकि जानवरों से शव की रक्षा की जा सके।प्रागैतिहासिक काल से संबंधित पाषाण घेरे छत्तीसगढ़ के निम्न स्थानों से प्राप्त हुए है। करहीभदर,चिरचारी(बालोद)गढ़ धनोरा (कोंडागांव)

प्रवीण कुमार प्रधान
PR CLASSES BALODA


