भूगोल एक परिचय — भाग 1

सामान्य भूगोल  

Upsc,Cgpsc cgvyapm एवं अन्य राष्ट्रीय एवं राज्यीय  परीक्षा के लिए भूगोल विषय बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि इस विषय से हमेशा से कई प्रश्न पूछे गए है। upsc एवं cgpsc में प्री एग्जाम एवं मुख्य परीक्षा में भूगोल विषय से संबंधित प्रश्न पूछे जाते है।

तो फिर प्रारंभ करते एक नए विषय के साथ हमारा यह ब्लॉग जहाँ भूगोल से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी,,,, ,, 

   सामान्य परिचय

सर्वप्रथम “भूगोल”शब्द का प्रयोग एक ग्रीक विद्वान इरिटस्थनीज ने किया था।

*Geography (भूगोल) शब्द एक ग्रीक भाषा है। दो मूल शब्द (Geo)पृथ्वी और(Grophos) वर्णन से मिल के बना है।

*सर्वप्रथम हिकेटियस ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक “जस पीरियड” (Ges periods)पुस्तक में पृथ्वी का क्रमबद्ध वर्णन किया इसलिए इन्हें “भूगोल का जनक” कहा जाता है।

*जैव भूगोल का विस्तार से अध्ययन करने के कारण “वर्तमान भूगोल का जनक” अलेक्जेंडर वॉल हम्बोल्ट को कहा जाता है । इनकी प्रसिद्ध पुस्तक कॉसमॉस में अनेकता में एकता का सिद्धांत दिया गया है।

वान हम्बोल्ट

*भूगोल के नामकरण एवं इस विषय को प्राथमिक स्तर पर व्यवस्थित स्वरूप प्रदान करने का श्रेय यूनान के निवासियों को जाता है।

*19वीं शताब्दी में भूगोल को स्वतंत्र  विषय के रूप में मान्यता मिली।

*20 वीं शताब्दी में भूगोल की दो विचारधारा प्रस्तुत की गई—

1.सम्भववाद–

इस मत के अनुसार अपने मनुष्य अपने पर्यावरण में परिवर्तन करने में समर्थ है तथा प्रकृति प्रदत्त अनेक संभावनाओं को अपनी इच्छा अनुसार उपयोग कर सकता है।

इस मत के प्रमुख समर्थक—वाइडल-डी-ब्लास,फेब्रे

2.निश्चयवाद– इस मत के अनुसार मनुष्य के सारे काम पर्यावरण द्वारा निर्धारित होते है,अतः मनुष्य को स्वेच्छा पूर्वक कुछ करने की स्वतंत्रता कम है।

समर्थक– रिटर,रेटजेल, एलन सेम्प्यूल, हटिंगटन

ये तो हो गया भूगोल विषय के कुछ सामान्य परिचय,,,,आज भी जब हम भूगोल शब्द का नाम सुनते ही हमारे मस्तक पटल पर ब्रह्मांड शब्द जरूर विचार में आता है। हम ब्रम्हांड की कल्पना करने लगते है,ओर कई सवाल हमारे मन में स्वतः आने लगते है। तो आइए समझते है ,ब्रह्मण्ड क्या है?

ब्रह्मांड— अस्तित्वमान द्रव्य एवं ऊर्जा के सम्मिलित रूप को ब्रह्मांड कहते है। अर्थात मनुष्य के मन में जो सम्पूर्ण विश्व का चित्र उभर के आया उसे ब्रह्मांड का नाम दे दिया गया।

ब्रह्मांड से संबंधित कुछ अवधारणाएं–

1.जियोसेंट्रिक(भुकेन्द्रित)(140ई.)- इस अवधारणा के प्रतिपादक खगोलशास्त्री क्लाडियस टॉलमी(मिश्र-यूनानी)है। इस अवधारणा के अनुसार पृथ्वी ब्रह्मांड के केंद्र में है तथा सूर्य व अन्य ग्रह इसकी परिक्रमा करते है।

बहुत समय तक लोग इस अवधारणा को मानते रहे है।

2.हेलियोसेंट्रिक (सूर्यकेन्द्रित)–पोलैंड के खगोलशास्त्री निकोलस कॉपरनिकस ने सन 1543ई.में हेलियो सेंट्रिक अवधारणा प्रस्तुत की जिसके अनुसार ब्रह्मांड के केंद्र में पृथ्वी नहीं बल्कि सूर्य है। इनकी यह अवधारणा सौरपरिवार तक ही सीमित थी।

1805 ई.में ब्रिटेन के खगोलशास्त्री विलियम हर्शेल ने अंतरिक्ष का अध्ययन कर बताया कि सौर मंडल आकाशगंगा का एक हिस्सा मात्र है,और ब्रह्मांड में अनगिनत आकाशगंगाएं Mविद्यमान है।

ब्रह्मांड उत्पत्ति के प्रमुख सिद्धांत–

1.महाविस्फोट सिद्धान्त(Big-bang theory)–

प्रतिपादक–एब जार्ज लेमेतेयर

इस सिद्धांत के अनुसार, ब्रह्मांड एक अत्यधिक सघन एवं उच्च तापमान वाली एकल पिंड के रूप में था जब इस पिंड में महाविस्फोट हुआ और यह छोटे छोटे टुकड़ों में बिखर गया जिससे कालांतर में ब्रह्मांडीय पिंडों एवं आकाशगंगाओं का निर्माण हुआ। इन्ही पिंडों के ठंडा होने से ग्रह एवं उपग्रहों का निर्माण हुआ। यह सिद्धांत अभी तक सर्वमान्य सिद्धान्त है। महाविस्फोट की घटना वैज्ञानिकों के अनुसार लगभग 13.7 अरब वर्ष पूर्व अनुमानित की गई है।

बिग-बैंग सिद्धांत ग्राफिक्स

2.स्थिर अवस्था संकल्पना–

प्रतिपादक–थॉमस  गोल्ड ,एवं हर्मन बॉडी 

इस सिद्धांत के अनुसार ब्रह्मांड का न तो आदि है ओर न  ही कोई अंत यह समयानुसार परिवर्तित होते रहता है।

3.दोलन सिद्धान्त–

प्रतिपादक-एलन संडेजा

ब्रह्मांड की उत्पत्ति का यह नवीन सिद्धांत है जिसके अनुसार ब्रह्मांड करोड़ो वर्षों के अंतराल में विस्तृत और संकुचित होते रहता है।120 करोड़ वर्ष पहले एक तीव्र विस्फोट के फलस्वरूप ब्रह्मांड का विस्तार हो रहा है तथा 290 करोड़ वर्ष बाद गुरुत्वाकर्षण की कमी के कारण ब्रह्मांड में संकुचन होगा तथा ब्रह्मांड संकुचित होकर एक बिंदु के आकार का हो जाएगा तब इसमे पुनः विस्फोट होगा। इस तरह का क्रम चलते रहता है। इसलिए इस सिद्धांत को दोलायमान सिद्धान्त कहा जाता है।

4.स्फीति सिद्धांत–

(एलेन गुथ) — सन 1980 में एलन गूथ ने इस सिद्धांत का प्रतिपादन किया था जिसके अनुसार ब्रह्मांड के जुड़े द्रव्यमान के घनत्व की तुलना में उसका वास्तविक घनत्व बहुत अधिक है।

अतः कहा जा सकता है ,कि  ब्रह्मांड में काले पदार्थ का अस्तित्व अधिक है। 

*नासा (NASA) द्वारा 30 जून2001 को डेविड विल्किंसन के नेतृत्व में बिग बैंग की पुष्टि हेतु मैप परियोजना का शुभारंभ किया गया।

*ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने के लिए 30 मार्च 2010 ई.को यूरोपीयन सेंटर फॉर न्यूक्लियर रिसर्च ने जिनेवा में पृथ्वी की सतह से 50 से 127 मीटर नीचे 27.36 km लम्बे सुरंग में लार्ज हैड्र्न कोलाइजर (LHC) नामक महाप्रयोग सफलतापूर्वक किया गया । इसमे प्रोटॉन बीमों को लगभग प्रकाश की गति से टकराया गया तथा हिग्स बोसॉन(गॉड पार्टिकल) के निर्माण का प्रयास किया गया।

*ब्रह्मांड का व्यास 10का घातांक 8 प्रकाश वर्ष है।

*ब्रह्मांड में अनुमानित 100 अरब मंदाकिनी है।

*प्रत्येक मंदाकिनी में 100 अरब तारे होते है।

मंदाकिनी–

तारों का ऐसा समूह,जो धुंधला सा दिखाई पड़ता है तथा जो तारा -निर्माण की प्रक्रिया की शुरुआत का गैस पुंज है ,मंदाकिनी कहलाता है।

पृथ्वी की मंदाकिनी है दुग्धमेखला(आकाशगंगा)

पृथ्वी की मंदाकिनी को सबसे पहले गैलीलियो ने देखा था। पृथ्वी की नई ज्ञात मंदाकिनी ड्वार्फ मंदाकिनी है।

निहारिका(nebula)– यह एक ब्रह्मांडीय नर्सरी है जहां तारों का जन्म होता है। निहारिका में धूल और गैसों का बादल होता है।

निहारिका बनने के दो प्रमुख वजह है— 

1.ब्रह्मांड की उत्पत्ति

2.किसी विस्फोटक तारे से बने सुपरनोवा से। 

बेल ओर कर्क सुपरनोवा से बने निहारिका है।

निहारिका के प्रकार–

1.उत्सर्जन निहारिकाएं–

सबसे सुंदर और रंग बिरंगी। 

उदाहरण- चील एवं झील निहारिका

2.परावर्तन निहारिकाएं– यह तारों के प्रकाश को परावर्तित करती है।

उदाहरण-प्लेइडेस निहारिका

3.श्याम निहारिका–

ये अपने पीछे से आ रही प्रकाश को रोक देती हैं। इसलिए आकाश गंगा में बहुत दूर तक देख नहीं सकते।

4.ग्रहीय निहारिकाएं- 

इसका निर्माण उस वक्त होता है जब तक सामान्य तारा एक लाल दानव तारे में बदलकर अपने बाहरी तहों को उत्सर्जित करती है।इनका आकार गोल होता है।

ओरियन नेबुला– हमारी आकाशगंगा के सबसे शीतल और चमकीले तारों का समूह। 

आज के पोस्ट में इतना ही । अगले पोस्ट में सोलर सिस्टम(सौर परिवार) एवं भारत का भूगोल का अध्ययन करेंगे क्योंकि भारत का भूगोल सभी परीक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है,@pravinpradhan225 बहुत से प्रश्न प्रारंभिक एवम मुख्य परीक्षाओं में पूछे जाते है। 

पोस्ट पसन्द आया तो लाइक ,शेयर ओर कमेंट जरूर करें । आगे इससे भी अच्छे पोस्ट आने वाले है जो कि सभी परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण होगा। 

PR CLASES BALODA 

PRAVIN KUMAR PRADHAN 

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1 टिप्पणी

  1. Komal prasad das's avatar Komal prasad das कहते हैं:

    Ek number bhaiyya..
    very helpful…

    पसंद करें

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