कुषाण वंश(30 ई.पू.से 375 ई.तक)
- संस्थापक– कुजूल कडफिसेस
- वास्तविक संस्थापक–विम कडफिसेस
- जाति- यूची/तोखरी
- राजधानी– पेशावर(पुरुषपुर)
- दूसरी राजधानी–मथुरा
- मूल क्षेत्र– मध्य एशिया(चीन),बैक्ट्रिया
- प्रमुख अभिलेख– रैवतकअभिलेख
(अफगानिस्तान)
निर्माण- कनिष्क
स्थान–शुर्ख कोटल
(लिपी–किलक लिपी,भाषा–यूनानी)
खोजकर्ता- विकनर
कुषाण वंश के प्रमुख राजा-
1.कुजूल कडफिसेस–
कुषाण वंश का संस्थापक
राजधानी- तक्षशिला
- बैक्ट्रिया में यूनानी राजा(हरमियस) को पराजित कर कुषाण वंश की स्थापना की ।
- महाधिराज की उपाधि धारण करने वाला प्रथम कुषाण शासक था।
- तांम्बे के सिक्के जारी किए जिसमें हरमियस का चित्र अंकित था ।
- शासन क्षेत्र– काबुल, कंधार,तक्षशिला
2.विमकडफिसेस–
- कुषाण वंश का वास्तविक संस्थापक।
- कुषाण वंश का प्रथम शासक जिसने सोने की सिक्के जारी किए।
- इसकी मुद्रा में शिव/ नंदी के चित्र अंकित थे ,अतः विमकडफिसेस शैव धर्म का उपासक था।
- इसकी राजधानी पेशावर थी।
- इसने सर्वलोकेश्वर और महेश्वर की उपाधि धारण किया था।

(Pic-wikimedia)
3.कनिष्क प्रथम–
- कुषाण वंश का प्रतापी राजा कनिष्क प्रथम
- 78ई.शक संवत चलाया जिसे भारत सरकार द्वारा प्रयोग किया जाता है।
- कनिष्क ने अपनी दूसरी राजधानी मथुरा को बनाया।
- प्रथम शताब्दी में कनिष्क के शासन काल में चतुर्थ बौद्ध संगीति कुण्डलवन(कश्मीर)में हुई थी।
- कनिष्क का राजवैद्य आयुर्वेद के महान विद्वान चरक थे।इन्होंने चरकसंहिता की रचना की
- शुश्रुतसंहिता के लेखक शुश्रुत भी कनिष्क के दरबार में रहते थे। शुश्रुत को शल्य चिकित्सा का जनक भी कहा जाता है।
- महविभाषसूत्र को बौद्ध धर्म का विश्वकोश कहा जाता है इसके रचयिता वसुमित्र थे।
- कनिष्क का राजकवि अश्वघोष था ,जिसने बुद्धचरित की रचना की जिसे बौद्धों का रामायण कहा जाता है।
- कनिष्क स्वयं को देवपुत्र
कहता था । यह उपाधि कनिष्क ने चीनियों से लिया था।
- कनिष्क ने रेशम मार्ग को आरम्भ तथा विकसित भी किया और इस मार्ग को सुरक्षा भी प्रदान की । इस मार्ग से चीन मध्य एशिया के साथ रेशम का व्यापार करता था।चुंगी कर वसूल करने वाला शासक भी कनिष्क था।
- गांधार शैली और मथुरा शैली का विकास कनिष्क के शासनकाल मे हुआ था।
- सर्वाधिक शुद्ध सोने के सिक्के जारी करने वाले कुषाण वंश के शासक थे।
- कनिष्क के शासनकाल में वास्तुकला में सर्वाधिक विकास हुआ।
(Pic- wikimedia)
- चीनी जनरल पेन चौआ ने कनिष्क को हराया था।
- कनिष्क की मृत्यु 102 ई.में हुई।
छत्तीसगढ़ (दक्षिण कोसल) में कुषाण वंश का प्रभाव–
दक्षिण कोसल में कुषाण वंश के शासकों का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिलता है,किन्तु कुषाणों द्वारा जारी किए गए तांम्बे और सोने के सिक्के प्राप्त हुए है। अतः कहा जा सकता है, कि दक्षिण कोसल के स्थानीय राजवंश उनके अधीनस्थ शासन करते थे ।
- तांबे के सिक्के बिलासपुर में मिले है।
- इस वंश के सोने के सिक्के तेलिकोटा(रायगढ़) में मिले है।